पेशाब में खून आना क्या होता है?

  • पेशाब में खून दिखना काफी भयावह हो सकता है। जबकि कई ऐसे उदाहरण हैं, जो पेशाब में खून आने की स्थिति को हानिरहित बताते हैं और कई मामलों में पेशाब में खून आना किसी गंभीर विकार का संकेत भी दे सकता है।
  • पेशाब में स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले खून को ग्रोस हेमाट्यूरिया (Gross Hematuria) कहा जाता है। मूत्र में रक्त (जो केवल माइक्रोस्कोप की मदद से देखा जा सकता है) तब पाया जाता है जब डॉक्टर पेशाब की जांच करते हैं, उसे माइक्रोस्कोपिक हेमाट्यूरिया (Microscopic Hematuria) कहा जाता है। किसी भी तरह से खून आने के कारण को निर्धारित करना जरूरी होता है, क्योंकि पेशाब में खून अपने आप भी आ सकता है और यह किसी अन्य कारण से भी जुड़ा हो सकता है।
  • कभी-कभी पेशाब में खून की मात्रा इतनी कम होती है कि उनको साधारण आंखों सेनहीं देखा जा सकता और उनका पता तब चलता है जब किसी कारणवश पेशाब टेस्ट करवाया जाता है। चूंकि एक स्वस्थ पेशाब में बिलकुल भी खून की मात्रा नहीं होती, इसलिए डॉक्टर द्वारा पेशाब की जांच करना जरूरी होता है।
  • पेशाब में खून तब मिलता है जब पेशाब गुर्दे, मूत्राशय और मूत्र पथ (ट्यूब) के अंदर से गुजरता है।

पेशाब में खून आने के प्रकार –

पेशाब में खून आने की समस्या के कितने प्रकार होते हैं?

  • ग्रोस हेमाट्यूरिया (Gross hematuria) – इसमें पेशाब में खून की मात्रा अधिक होती है, जिसको आंखों द्वारा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
  • माइक्रोस्कोपिक हेमाट्यूरिया (Microscopic hematuria) – इसमें पेशाब में खून की मात्रा बहुत कम होती है, जिसको देखने के लिए माइक्रोस्कोप की आवश्यकता होती है।

पेशाब में खून आने के लक्षण –

पेशाब में खून आने के लक्षण व संकेत क्या हो सकते हैं?

हेमाट्यूरिया से ग्रसित लोगों में कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं और इसके लक्षण पेशाब में खून आने के कारणों पर निर्भर करते हैं:

  • पीठ में या कमर के एक तरफ दर्द होना,
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द होना,
  • अचानक से पेशाब आना,
  • पेशाब करने में कठिनाई,
  • यदि पेशाब में पर्याप्त मात्रा में खून मौजूद है तो वह खून का थक्का (Blood Clot) बना सकता है। खून का थक्का पेशाब के प्रवाह को पूरी तरह से अवरुद्ध कर सकता है, जिससे अचानक से अत्यंत तेज दर्द और पेशाब करने में अक्षमता उत्पन्न हो जाती है। पेशाब में गंभीर रूप से खून आना थक्के का कारण हो सकता है। खून में थक्के आम तौर पर मूत्र पथ में किसी प्रकार की चोट या घाव के कारण बन सकते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को अपने पेशाब में खून दिखाई देता है, तो उनको एक या दो दिन के भीतर डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। लेकिन जिन लोगों के पेशाब में खून की अधिक मात्रा आ रही है, पेशाब करते समय अधिक दर्द हो रहा है, पेशाब करने में कठिनाई या अक्षमता महसूस हो रही है, तो उन्हें उसी समय डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

जिन लोगों के पेशाब में खून की मात्रा है उनमें कुछ लक्षण व विशेषताएं चिंता का कारण बन सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं-

  • पेशाब में खून की अधिक मात्रा,
  • 50 साल के बाद की उम्र,
  • टांगों और पैरों में सूजन,
  • हाई ब्लड प्रैशर (हाई बीपी)

पेशाब में खून आने के कारण –

पेशाब में खून आने के कारण व जोखिम कारक क्या हो सकते हैं?

पेशाब में खून की उपस्थिति के लिए कई कारण जिम्मेवार हो सकते हैं, जिनमें कुछ सौम्य कारणों से लेकर गंभीर कारण भी शामिल हैं, जैसे-

  • मूत्राशय में संक्रमण (Bladder Infection) जैसे सिस्टाइटिस  – इसमें अक्सर पेशाब करते समय दर्द व जलन महसूस होती है।
  • गुर्दे में संक्रमण (Kidney Infection) – इसके कारण शरीर का उच्च तापमान और पेट के एक तरफ दर्द होता है।
  • गुर्दे में पथरी (Kidney Stones) – यह कई बार दर्द रहित भी होती है, लेकिन कई बार यह गुर्दे से आने वाली एक ट्यूब को बंद कर देती है, जिससे गंभीर पेट दर्द शुरू हो जाता है।
  • यूरेथ्राइटिस (Urethritis) – मूत्र को शरीर से बाहर ले जाने वाली ट्यूब (मूत्रमार्ग) में सूजन होना। यह समस्या अक्सर यौन संचारित रोगों (STI) से होती है, जैसे क्लामिडिया।
  • बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि (Enlarged Prostate Gland) – यह वृद्ध पुरूषों में होने वाली एक सामान्य स्थिति है, जिसका पौरुष ग्रंथि में कैंसर से कोई लेना-देना नहीं होता। बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि मूत्राशय की जगह घेर लेती है और उसे दबा देती है, जिससे कुछ समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जैसे पेशाब करने में कठिनाई और बार-बार पेशाब करने की जरूरत पड़ना आदि।
  • मूत्राशय में कैंसर – यह अक्सर 50 साल की उम्र के ऊपर के लोगों में होता है, इसमें बार-बार और तत्काल स्थिति में पेशाब करने की जरूरत पड़ती है और साथ ही पेशाब करने के दौरान दर्द भी महसूस होता है।
  • गुर्दे का कैंसर – यह भी अक्सर 50 साल की उम्र से ऊपर के लोगों को प्रभावित करता है। इसके कारण से पसलियों के नीचे लगातार दर्द हो सकता है।
  • पौरुष ग्रंथि में कैंसर (Prostate Cancer) – आमतौर पर यह 50 साल से ऊपर की उम्र वाले पुरूषों में होता है और धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके अन्य लक्षणों में तत्काल पेशाब करने की आवश्यकता होना, बार-बार पेशाब करना और मूत्राशय खाली करने में कठिनाई महसूस होना आदि शामिल है।

जिन लोगों के पेशाब में खून उपस्थित होने की अधिक संभावना होती है, उनमें शामिल हैं-

  • यूरिनरी स्टोन (Urinary Stones) होना।
  • कुछ दवाएं लेना, जिनमें खून पतला करने वाली दवाएं, एस्पिरिन एंटीबायोटिक्स और अन्य दर्द निवारक दवाएं शामिल हैं।
  • जोरदार व्यायाम करना, जैसे लंबी दूरी की दौड़।
  • बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण।
  • परिवार में पहले किसी को गुर्दों से संबंधित रोग होना।

अन्य कारक जो पेशाब का रंग बदलने का कारण बनते हैं-

  • कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थ जो पेशाब को गुलाबी रंग में बदल देते हैं, जैसे चुकंदर।
  • कुछ प्रकार की दवाएं जो पेशाब को लाल या भूरे रंग में बदल देती हैं, जैसे एंटीबायोटिक्स (नाईट्रोफ्यूरैंटोइन और रिफैंपीसिन)।
  • मासिक धर्म के दौरान पेशाब में खून मिलकर आना, जो इसे गुलाबी रंग में बदल सकती है।

पेशाब में खून आने के बचाव के उपाय –

पेशाब में खून आने की रोकथाम कैसे की जा सकती है?

पेशाब में खून आने की स्थिति को रोकना कठिन होता है, लेकिन कुछ ऐसे स्टेप हैं जिनका अनुसरण करके इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • गुर्दे में पथरी होने की स्थिति में – खूब मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें, नमक के सेवन की मात्रा पर निगरानी रखें। ऑक्सीलेट और पशु प्रोटीन जैसे उच्च पदार्थों का सेवन कम करें।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं – गुर्दे या मूत्राशय में कैंसर के जोखिम से बचने के लिए धूम्रपान से बचना सबसे प्रभावी उपाय है। धूम्रपान ना करने वालों के मुकाबले धूम्रपान करने वाले लोगों में मूत्राशय कैंसर होने के जोखिम 4-5 गुना अधिक होते हैं।

पेशाब में खून आने का परीक्षण –

पेशाब में खून आने का परीक्षण​/ निदान कैसे किया जाता है?

पेशाब में खून आने के कारण को निर्धारित करने के लिए डॉक्टर मरीज से उसके लक्षणों से जुड़े कुछ सवाल पूछ सकते हैं, जैसे दर्द या तकलीफ आदि के बारे में। इस समस्या का निदान करने के लिए डॉक्टर को मरीज का मूत्र परीक्षण करने की भी जरूरत पड़ती है। अगर डॉक्टरों को लगता है कि मरीज को संक्रमण है तो वे बाकी टेस्ट के रिजल्ट आने से पहले मरीज को एंटीबायोटिक्स दवाएं देते हैं।

अगर टेस्ट रिजल्ट में संक्रमण के कोई परिणाम दिखाई नहीं देते तो मरीज को विशेषज्ञों के पास रेफर कर दिया जाता है। इस स्थिति में, डॉक्टर मरीज का शारीरिक परीक्षण करते हैं। जिसमें पुरूषों के लिए गुदा का परीक्षण और महिलाओं के लिए योनि का परीक्षण शामिल होता है।

पेशाब में खून आने के कारण को निर्धारित करने के लिए कई अलग-अलग परीक्षणों का प्रयोग किया जाता है, जैसे-

  • माइक्रोस्कोपिक परीक्षण द्वारा पेशाब का परीक्षण करना सिर्फ पेशाब में खून की मौजूदगी ही नहीं बताता बल्कि संक्रमण के सबूत भी दिखाता है, जैसे सफेद रक्त कोशिकाएं या बैक्टीरिया आदि। अगर गुर्दे में किसी प्रकार की बीमारी है, तो मूत्र विश्लेषण से उस बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
  • यूरीन कल्चर टेस्ट की मदद से सूक्ष्मजीवों की आनुवंशिक सामग्री के सटीक कारणों की पहचान की जा सकती है।
  • गुर्दे के कार्यों का मूल्यांकन करने के लिए खून टेस्ट किया जाता है।
  • सिस्टोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें एक पतली ट्यूब की मदद से मूत्रमार्ग और मूत्राशय के अंदर की जांच की जाती है। सिस्टोस्कोपी की मदद से ऊतकों के सेम्पल भी लिए जा सकते हैं, जिसकी मदद से कैंसर कोशिकाओं का पता लगाया जाता है।
  • गुर्दे की बीमारियां जो मूत्र में खून आने का कारण बनती हैं, इन बीमारियों के परीक्षण करने के लिए गुर्दे की बायोप्सी (जांच के लिए गुर्दे से सेम्पल लेना) की जा सकती है।
  • गुर्दे के लिए कुछ इमेजिंग टेस्ट जैसे सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, और इंट्रानर्वस पाइयोलग्राम आदि का इस्तेमाल ऊपरी मूत्र पथ में खून आने के कारणों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

पेशाब में खून आने का उपचार –

पेशाब में खून आने का उपचार कैसे किया जाता है?

पेशाब में खून आने के ज्यादातर कारण, जैसे कुछ दवाएं, छोटी-मोटी चोटें या गुर्दे की पथरी आदि अस्थायी होती हैं, जिनका लंबे समय तक प्रभाव नहीं पड़ता। ज्यादातर लोगों के लिए मूत्र पथ का संक्रमण इलाज योग्य होता है। अगर जल्दी पता लगा लिया जाए तो मूत्र पथ के कैंसर का अच्छा पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। मूत्र पथ के कैंसर का समग्र पूर्वानुमान, कैंसर के सटीक प्रकार पर निर्भर करता है।

पेशाब में खून आने के कारणों के आधार पर इसका उपचार किया जाता है, जिनमें निम्न शामिल हो सकते हैं-

  • मूत्र पथ के संक्रमण को साफ करने के लिए एंटीबायोटिक दवाइयां लेना।
  • बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि को कम करने के लिए डॉक्टर द्वारा लिखी दवाएं लेना।
  • मूत्राशय या गुर्दे की पथरी को तोड़ने के लिए शॉक वेव थेरेपी (Shock Wave Therapy) का इस्तेमाल करना।

कुछ मामलों में, उपचार जरूरी नहीं होता। जब तक पेशाब में से खून की मात्रा पूरी तरह से गायब ना हो जाए, तब तक डॉक्टर के कहे के अनुसार उनके पास जाते रहें।

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