अतिसक्रिय मूत्राशय

अतिसक्रिय मूत्राशय क्या है?

अतिसक्रिय मूत्राशय का आपके जीवन के लगभग हर पहलू पर एक बड़ा प्रभाव हो सकता है। यह आपको छुट्टियां, डिनर पर बाहर जाना और अन्य सामाजिक स्थितियों से बचने के लिए मजबूर कर सकता है। आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिताने वाले बहुमूल्य समय को भी खो सकते हैं। क्योंकि आप को डर लगता है कि आपकी अतिसक्रिय मूत्राशय की बिमारी गलत समय पर ट्रिगर करेगी और आपको शर्मिंदा करेगी।
इस समस्या से निपटने के लिए कई तरीके उपलब्ध हैं। अतिसक्रिय मूत्राशय के इलाज के कई प्रकार उपलब्ध हैं। जैसे कि – दवा, व्यवहारिक परिवर्तन, दोनों का संयोजन। डॉक्टर द्वारा अपनी पूरी तरह से जांच कराकर और उनके दिए हुए निर्देशों का पालन करके आपका इलाज सफलतापूर्वक हो सकता है और आप अपनी पुरानी दिनचर्या में वापस आ सकते हैं।

अतिसक्रिय मूत्राशय के लक्षण के बारे में

इसके लक्षण निम्नलिखित हैं।

  • दिन और रात हरदम पेशाब का आना- दोस्तों बार-बार पेशाब का आना अतिसक्रिय मूत्राशय को दर्शाता है।
  • निषामेह।
  • उत्तेजना पर संयम।
  • अनियंत्रित अचानक पेशाब का आग्रह।
  • नींद में परेशानी- अगर व्यक्ति को रात में बार-बार उठकर मूत्र त्याग के लिए जाना पड़ता है तो ये आम बात नहीं है। पेशाब की वजह से नींद में रुकावट आना अतिसक्रिय मूत्राशय का लक्षण है
  • लीकेज होना- कभी-कभी क्या होता है कि व्यक्तियोंको पेशाब इतनी जोर से आती है कि वो टॉयलेट पहुंचने के पहले ही अपना काम कर देते हैं और जब यह रोग व्यक्तियोंको होता है तो ये लक्षण आम हो जाता है।
  • आठ से दस बार पेशाब जाना- कोई भी आम आदमी आठ से दस बार तभी पेशाब जाता है जब उसने शराब पी हो या फिर काफी अधिक मात्रा में पानी पिया हो। अगर इसके बावजूद भी व्यक्ति आठ से दस बार टॉयलेट जाता है इसका मतलब है कि उसे अतिसक्रिय मूत्राशय की शिकायत है।

बहुत बार पेशाब के कारण के बारे में

  • बढ़ती उम्र की वजह से या फिर डायबिटीज या फिर किसी इंफेक्शन की वज़ह से ये हो सकता है।
  • ब्लैडर का ट्यूमर।
  • प्रेगनेंसी के दौरान या फिर बच्चे को जन्म देने के कुछ समय बाद।
  • कुछ ऐसी दवाओं का सेवन जिसमें कैफीन की मात्रा काफी हो।
  • उम्र की अधिकता भी अतिसक्रिय मूत्राशय का कारण है।
  • प्रोस्टेट कैंसर या फिर प्रोस्टेट में सूजन अतिसक्रिय मूत्राशय का ही कारण है पर ये पुरुषों में होता है।
  • किसी दुर्घटना, सर्जरी या फिर किसी बीमारी से नर्व को कोई नुकसान होता है तो भी लोग इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं।
  • कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी इसकी शिकायत हो सकती है।
  • कब्ज़ भी इसका एक कारण है।

उपस्थिति

इस रोग के हर साल दुनिया में लगभग दस लाख लोगों को अपनी चपेट में ले लेता है। अतिसक्रिय मूत्राशय की जो समस्या है वह किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति को हो सकती है और महिला और पुरूष दोनों को इसकी समस्या हो सकती है। पर शोध के मुताबिक ये पाया गया है कि इसका महिलाएं ज्यादा शिकार होती हैं।

प्रक्रियाएं

इस बीमारी के इलाज के लिए निम्न प्रक्रिया है।

  • मूत्राशय को हटाना- स्टेमा या फिर नेबलाडडर का निर्माण करके मूत्राशय को हटाया जा सकता है।
  • सर्जरी- सर्जरी करके मूत्राशय की जो क्षमता है उसे बढ़ाया जा सकता है।
  • मूत्राशय के प्रशिक्षण- पेशाब करने की इच्छा को महसूस करने के हिसाब से आवाज आने में देर लगना।
  • तंत्रिका उत्तेजना प्रक्रिया- अतिसक्रिय मूत्राशय के लक्षणों में सुधार करने हेतु आवश्यक है।
  • स्वस्थ वज़न- स्वस्थ वज़न भी इसमें मदद करता है।

अतिसक्रिय मूत्राशय के जोखिम भरे कारक

  • आंत्र नियंत्रण समस्याएं।
  • मधुमेह का होना।
  • वजन का ज्यादा होना।
  • बढ़ा हुआ अग्रागम।
  • आनुवांशिकता।
  • धूम्रपान अथवा अल्कोहल।

इस रोग के होने पर निम्न प्रयोगशाला या फिर प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है;-

  • सीयस्टोमेट्री-मूत्राशय के दबाव को नापने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • न्यूरोलॉजिकल परीक्षा-संवेदी समस्याएं या असामान्य सजगता की पहचान करने के लिए ये होती है।
  • मूत्र परीक्षण- संक्रमण, रक्त या अन्य असामान्यताओं के निशान का परीक्षण करने के लिए मूत्र परीक्षण किया जाता है।
  • शारीरिक परीक्षा-इसका इस्तेमाल पेट और जननांगों की जांच के लिए किया जाता है।

अगर इस रोग का समय पर इलाज नहीं होता है तो व्यक्तियोंको निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

  • नींद में रुकावट आना।
  • बाधित सो साइकल।
  • कामुकता से जुड़े हुए मुद्दे।
  • चिंता का रहना, सर में दर्द होना।
  • भावनात्मक संकट।

दोस्तों, हम आपको बता दें कि अगर समय पर अतिसक्रिय मूत्राशय का इलाज नहीं करवाया जाए तो ये बहुत बड़ा खतरा भी बन सकता है और हाँ दोस्तों कई बार इसका इलाज न करवाने पर ये पूरे शरीर में फैल जाता है जिसकी वजह से व्यक्तियोंकी मौत भी हो जाती है। इसीलिए सभी को सलाह दी जाती है कि समय रहते ही बीमारियों का इलाज करवाएं। जिस किसी व्यक्ति को अतिसक्रिय मूत्राशय के लक्षण दिखाई दे वो तुरंत डॉक्टर से मिले और डॉक्टर को अपनी समस्या खुलकर बिना किसी झिझक के बताए ताकि वो बिना किसी गलती के आपकी बीमारी का इलाज कर पाए।

इसके अलावा लाइफस्टाइल में व्यक्तियोंको थोड़े से बदलाव करना बहुत ही आवश्यक है। अगर व्यक्ति अपने लाइफस्टाइल को नहीं सुधारेगा तो उसे लीकेज या फिर सर्जरी आदि की समस्या से परेशान होना ही पड़ेगा। इसीलिए अतिसक्रिय मूत्राशय की समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में ही पानी पियें। न ही ज्यादा और न ही कम। मेडीटेशन और योगा भी अवश्य करें।

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